The Chess Players(Story)|by Munsi Premchand|Daffodils Book|Class-8th|Ingenious study|

Ingenious StudyAbout 6 min readMar 22, 2025Watch original
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डैफोडिल्स (कक्षा 8 अंग्रेजी पाठ 6) का विस्तृत सारांश

मुख्य अवधारणाएँ:

  • अवध का पतन
  • नवाब वाजिद अली शाह
  • मिर्ज़ा साजिद अली और अमीर रोशन अली (शतरंज के खिलाड़ी)
  • शतरंज के प्रति जुनून
  • ब्रिटिश उपनिवेशवाद
  • भारतीय शासकों का अलगाव
  • उदासीनता और पतन

1. कहानी की पृष्ठभूमि और मुख्य पात्र:

कहानी नवाब वाजिद अली शाह के शासनकाल के दौरान शुरू होती है, जो अवध के अंतिम स्वतंत्र शासक थे। 1856 में ब्रिटिशों ने उनके राज्य पर कब्जा कर लिया। कहानी दो अभिजात वर्ग के दोस्तों, मिर्ज़ा साजिद अली (मिर्ज़ा) और अमीर रोशन अली (अमीर) पर केंद्रित है, जो शतरंज के खेल के प्रति अपने अटूट प्रेम के लिए जाने जाते हैं। मुंशी प्रेमचंद ने इस कहानी को कुशलता से प्रस्तुत किया है।

2. कहानी का मूल विषय:

कहानी का मूल विषय भारतीय शासक वर्ग का अलगाव है, जिसने ब्रिटिश अधिकारियों को बिना किसी विरोध के अवध पर कब्जा करने में मदद की। राजा अपने राज्यों तक ही सीमित थे और उन्होंने एक-दूसरे का सहयोग नहीं किया।

3. शतरंज का खेल:

शतरंज का खेल, जिसके बारे में माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति पूर्वी भारत में गुप्त साम्राज्य के दौरान छठी शताब्दी में हुई थी, कहानी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उस समय, यह माना जाता था कि यह खेल दिमाग को तेज करता है। विश्वनाथन आनंद भारत के एक प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी हैं, जिनके पास विश्व रैंकिंग है।

4. लखनऊ में जीवनशैली:

वाजिद अली शाह के शासनकाल के दौरान, लखनऊ में खुशियों और मनोरंजन का माहौल था। अमीर और गरीब सभी अपनी-अपनी जीवनशैली का आनंद ले रहे थे। कुछ लोग नृत्य और संगीत का आनंद ले रहे थे, जबकि अन्य धूम्रपान और जुआ खेल रहे थे। राज्य के मामलों के बारे में किसी को कोई चिंता नहीं थी। मुर्गा लड़ाई और पतंगबाजी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती थीं।

5. मिर्ज़ा और अमीर का शतरंज के प्रति जुनून:

मिर्ज़ा साजिद अली और अमीर रोशन अली अपना अधिकांश समय शतरंज के बोर्ड पर अपनी चालों की योजना बनाने में बिताते थे। उनके पास विरासत में मिली संपत्ति थी, इसलिए उन्हें अपने जीवन यापन की कोई चिंता नहीं थी। हर सुबह, वे नाश्ता करते थे और शतरंज का खेल शुरू कर देते थे। उन्हें बार-बार घर से बुलाया जाता था कि उनका खाना तैयार है, लेकिन वे हमेशा जवाब देते थे कि टेबल तैयार रखी जाए।

6. पारिवारिक प्रतिक्रियाएँ:

मिर्ज़ा साजिद अली के परिवार के सदस्य उनके शतरंज खेलने के जुनून को पसंद नहीं करते थे। उनका मानना था कि यह खेल परिवारों को तबाह कर देता है। मिर्ज़ा की पत्नी हमेशा अपने पति को डांटने के मौके की तलाश में रहती थी, लेकिन उसे ऐसा मौका कभी-कभार ही मिलता था।

7. मिर्ज़ा और उनकी पत्नी के बीच बहस:

एक दिन, बेगम साहिबा ने सिरदर्द की शिकायत की और मिर्ज़ा को बुलाने के लिए अपनी नौकरानी को भेजा। अमीर साहिब ने मिर्ज़ा से कहा कि वह अपनी पत्नी से बात करने क्यों नहीं जाता। मिर्ज़ा ने जवाब दिया कि उसकी पत्नी चाहती है कि वह चला जाए क्योंकि वह खेल हार रहा है। अंत में, मिर्ज़ा खेल में बने रहने के लिए अपनी पत्नी के पास गया और खेल के लिए अपने दोस्त पर आरोप लगाया।

8. बेगम साहिबा का गुस्सा:

मिर्ज़ा की पत्नी लिविंग रूम में भाग गई और खिड़की से शतरंज की गोटियाँ फेंक दीं और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने मिर्ज़ा पर चिल्लाते हुए कहा कि अगर उसने इतनी एकाग्रता भगवान के लिए दिखाई होती, तो वह एक सिद्ध पुरुष बन जाता।

9. अमीर के घर पर शतरंज:

मिर्ज़ा ने घर छोड़ दिया और अमीर के घर पहुँच गया। दोनों दोस्त अमीर के घर पर फिर से शतरंज का खेल शुरू करने के लिए तैयार हो गए। अब, अमीर की बेगम की बारी थी मुश्किल में पड़ने की। उनकी स्वतंत्रता कम हो गई थी, और नौकर भी बड़बड़ा रहा था।

10. भविष्यवाणी:

कुछ पुराने समय के लोगों ने पड़ोस में अज्ञात आपदाओं की भविष्यवाणी करना शुरू कर दिया। उन्होंने अनुमान लगाया कि शतरंज के चक्कर में राज्य बर्बाद हो जाएगा।

11. रॉयल समन:

एक दिन, एक घुड़सवार आया और अमीर साहिब के बारे में पूछा। उसने संदेश छोड़ा कि अमीर को शाही दरबार में बुलाया गया है। शायद सेना के लिए कुछ सैनिकों की जरूरत थी। संदेशवाहक ने अमीर साहिब को बताया कि उन्हें सामने उपस्थित होना है और सोच समझकर बात करनी है।

12. गोमती नदी के किनारे:

दोनों शतरंज खिलाड़ी डर गए और उन्होंने एक शांत जगह पर खेल खेलने का फैसला किया। वे गोमती नदी के किनारे एक मस्जिद में गए और वहाँ शतरंज का खेल शुरू कर दिया।

13. राजनीतिक स्थिति:

देश की राजनीतिक स्थिति बिगड़ रही थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिक लखनऊ की ओर बढ़ रहे थे। कई लोग अपने परिवारों के साथ गाँव की ओर भाग गए।

14. शतरंज खिलाड़ियों की उदासीनता:

हमारे दो खिलाड़ी इन सब बातों से अनजान थे। जब वे घर पहुँचे, तो वे एक गुप्त रास्ते से गए। वे अपनी जागीरदारी की जिम्मेदारियों से बचना चाहते थे।

15. अंग्रेजों का आगमन:

एक दिन, उन्होंने फिर से ईस्ट इंडिया कंपनी के सैनिकों को देखा। अमीर साहिब ने कहा कि अंग्रेजी सेना आ रही है और भगवान हमारी सहायता करें। मिर्ज़ा ने जवाब दिया कि उन्हें आने दो और पहले इस खेल पर ध्यान दो।

16. नवाब की गिरफ्तारी:

उसी दोपहर, नवाब वाजिद अली शाह को पकड़ लिया गया और किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। शहर में कोई अशांति नहीं थी। शायद किसी स्वतंत्र देश के किसी अन्य शासक को इस तरह शांतिपूर्वक और अहिंसक रूप से नहीं हराया गया होगा। अवध के नवाब को कैदी बना लिया गया।

17. अंतिम लड़ाई:

शाम का समय था, और खंडहरों से उल्लू चिल्ला रहे थे। लेकिन दोनों खिलाड़ी अभी भी शतरंज के खेल में लगे हुए थे। मिर्ज़ा तीन बार हार गया। हर हार ने उसकी बदले की इच्छा को बढ़ा दिया। वह चिढ़ गया और उसने अपना आपा खो दिया। उसने विरोध किया और कहा कि उसे अपनी चाल नहीं बदलनी चाहिए और उसे अपनी गोटियों पर हाथ नहीं रखना चाहिए।

18. शब्दों का युद्ध:

दोनों के बीच शब्दों का युद्ध जारी रहा। मिर्ज़ा ने कहा कि अगर उसके परिवार में किसी ने पहले शतरंज खेला होता, तो उसे इसके नियम पता होते। उसने कहा कि उसके पूर्वज सिर्फ घास काटते थे, इसलिए वह शतरंज कैसे खेल सकता है।

19. खंजर:

अमीर साहिब ने कहा कि वह अपने पूर्वजों के चेहरे पर कालिख पोतने पर क्यों तुला हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें सोच समझकर बात करनी चाहिए, नहीं तो उन्हें दुख भोगना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आंखें निकाल लेंगे जो उन्हें घूरते हैं। मिर्ज़ा ने जवाब दिया कि क्या वह अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है। दोनों दोस्तों ने अपने खंजर निकाले और आपस में लड़ने लगे।

20. मृत्यु:

दोनों घायल होकर उसी जगह पर गिर गए और मर गए। उनके पास अपने राजा के लिए आंसू बहाने के लिए नहीं थे। उन्होंने शतरंज के खेल में एक वज़ीर को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। केवल टूटी हुई मेहराबें और मीनारें उनकी लाशों को देख रही थीं और उनके ऊपर शोक मना रही थीं।

21. अंग्रेजों का कब्जा:

अंग्रेजों की सेना ने बड़ी जीत के साथ लखनऊ पर कब्जा कर लिया।

निष्कर्ष:

कहानी अवध के पतन, भारतीय शासकों की उदासीनता और शतरंज के खेल के प्रति जुनून को दर्शाती है। मिर्ज़ा और अमीर के चरित्रों के माध्यम से, प्रेमचंद ने एक शक्तिशाली संदेश दिया है कि कैसे व्यक्तिगत जुनून और उदासीनता एक राज्य के पतन का कारण बन सकते हैं।

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