PRINCIPLES OF INHERITANCE AND VARIATION in 46 Minutes | Full Chapter Revision | Class 12th NEET

Competition WallahAbout 7 min readMar 21, 2025Watch original
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Key Concepts

  • इन्हेरिटेंस (Inheritance): एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कैरेक्टर्स का पास होना।
  • वेरिएशन (Variation): संतानों में माता-पिता से दिखने वाले अंतर।
  • प्योर लाइन (Pure Line): एक विशेष ट्रेट के लिए होमोजाईगस इंडिविजुअल्स की पीढ़ी।
  • कैरेक्टर (Character): प्लांट का कोई फीचर।
  • ट्रेट (Trait): कैरेक्टर का एक्सप्रेशन।
  • डोमिनेंट (Dominant): वह ट्रेट जो हेटेरोज़ाइगस कंडीशन में खुद को एक्सप्रेस करता है।
  • रिसेसिव (Recessive): वह ट्रेट जो केवल होमोजाईगस कंडीशन में एक्सप्रेस होता है।
  • मोनोहाइब्रिड क्रॉस (Monohybrid Cross): एक समय में केवल एक कैरेक्टर को ध्यान में रखकर किया गया क्रॉस।
  • पुनेट स्क्वायर (Punnett Square): संभावित जीनोटाइप और फेनोटाइप को दर्शाने वाला डायग्राम।
  • लॉ ऑफ़ डोमिनेंस (Law of Dominance): हेटेरोज़ाइगस कंडीशन में, एक अलील दूसरे पर हावी होता है।
  • इनकंप्लीट डोमिनेंस (Incomplete Dominance): हेटेरोज़ाइगस कंडीशन में, कोई भी अलील पूरी तरह से डोमिनेंट नहीं होता, जिससे एक इंटरमीडिएट फेनोटाइप बनता है।
  • कोडोमिनेंस (Codominance): हेटेरोज़ाइगस कंडीशन में, दोनों अलील समान रूप से एक्सप्रेस होते हैं।
  • डाईहाइब्रिड क्रॉस (Dihybrid Cross): एक समय में दो कैरेक्टर्स को ध्यान में रखकर किया गया क्रॉस।
  • लॉ ऑफ़ इंडिपेंडेंट असॉर्टमेंट (Law of Independent Assortment): विभिन्न कैरेक्टर्स के अलील स्वतंत्र रूप से एक दूसरे से अलग होते हैं।
  • लॉ ऑफ़ सेग्रीगेशन (Law of Segregation): युग्मक निर्माण के दौरान अलील अलग हो जाते हैं।
  • क्रोमोसोमल थ्योरी ऑफ़ इन्हेरिटेंस (Chromosomal Theory of Inheritance): जीन क्रोमोसोम पर स्थित होते हैं और इन्हेरिटेंस के दौरान क्रोमोसोम के साथ पास होते हैं।
  • पॉलीजेनिक इन्हेरिटेंस (Polygenic Inheritance): एक कैरेक्टर को कई जीनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • प्लिओट्रॉपी (Pleiotropy): एक जीन कई फेनोटाइपिक एक्सप्रेशंस को प्रभावित करता है।
  • लिंकेज (Linkage): एक ही क्रोमोसोम पर स्थित जीनों की एक साथ इनहेरिटेड होने की प्रवृत्ति।
  • रिकॉम्बिनेशन (Recombination): नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच जेनेटिक मटेरियल का आदान-प्रदान।
  • जेनेटिक मैप (Genetic Map): क्रोमोसोम पर जीनों की सापेक्ष स्थिति को दर्शाता है।
  • सेक्स डिटरमिनेशन (Sex Determination): वह प्रक्रिया जो किसी जीव के लिंग को निर्धारित करती है।
  • म्यूटेशन (Mutation): डीएनए सीक्वेंस में परिवर्तन।
  • पॉइंट म्यूटेशन (Point Mutation): डीएनए में एक सिंगल बेस पेयर में परिवर्तन।
  • ऑटोसोमल डिजीज (Autosomal Disease): ऑटोसोम पर जीन में म्यूटेशन के कारण होने वाली बीमारी।
  • सेक्स-लिंक्ड डिजीज (Sex-linked Disease): सेक्स क्रोमोसोम पर जीन में म्यूटेशन के कारण होने वाली बीमारी।
  • पेडिग्री एनालिसिस (Pedigree Analysis): कई पीढ़ियों में एक परिवार में ट्रेट्स के पैटर्न का अध्ययन।
  • क्रोमोसोमल डिसऑर्डर (Chromosomal Disorder): क्रोमोसोम की संख्या या संरचना में असामान्यता के कारण होने वाला विकार।
  • एनुप्लोइडी (Aneuploidy): क्रोमोसोम की संख्या में असामान्यता।
  • पॉलीप्लोइडी (Polyploidy): क्रोमोसोम के पूरे सेट की संख्या में वृद्धि।

प्रिंसिपल्स ऑफ़ इन्हेरिटेंस एंड वेरिएशन

इन्हेरिटेंस एंड वेरिएशन की परिभाषा

  • इन्हेरिटेंस का मतलब है माता-पिता से कैरेक्टर्स का संतानों में पास होना।
  • वेरिएशन का मतलब है संतानों में माता-पिता से दिखने वाले अंतर।
  • यह चैप्टर इन कैरेक्टर्स के पीढ़ी दर पीढ़ी पास होने और वेरिएशंस के आने के प्रिंसिपल्स को समझने के बारे में है।

मेंडल का योगदान

  • ग्रेगर जोहान मेंडल को फादर ऑफ़ जेनेटिक्स कहा जाता है।
  • उन्होंने 1856 से 1863 तक 7 वर्षों तक मटर के पौधों (पायसम सटाइवम) पर प्रयोग किए।
  • मेंडल की सफलता का कारण प्योर लाइन बनाना था।
  • प्योर लाइन का मतलब है कि एक विशेष ट्रेट के लिए होमोजाईगस इंडिविजुअल्स की पीढ़ी।
  • मेंडल ने सात कैरेक्टर्स का अध्ययन किया, जिनमें से प्रत्येक के दो ट्रेट थे, कुल 14 ट्रेट।

मटर के पौधे का चुनाव

  • मटर के पौधे का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि उनका जीवनकाल छोटा होता है, उन्हें आसानी से उगाया जा सकता है, और वे एक ही सीजन में बहुत सारे बीज पैदा करते हैं।
  • मेंडल ने एक समय में एक कैरेक्टर को अलग करके बाकी सभी कैरेक्टर्स को समान रखा।

मोनोहाइब्रिड क्रॉस

  • मोनोहाइब्रिड क्रॉस में, एक प्योर टॉल प्लांट को एक प्योर ड्वॉर्फ प्लांट के साथ क्रॉस किया जाता है।
  • F1 पीढ़ी में सभी पौधे हेटेरोज़ाइगस टॉल होते हैं (कैपिटल T स्मॉल t)।
  • F2 पीढ़ी में, फेनोटाइपिक रेशो 3:1 (टॉल:ड्वॉर्फ) और जीनोटाइपिक रेशो 1:2:1 (कैपिटल T कैपिटल T: कैपिटल T स्मॉल t: स्मॉल t स्मॉल t) होता है।
  • मोनोहाइब्रिड क्रॉस से लॉ ऑफ़ डोमिनेंस का पता चलता है।

लॉ ऑफ़ डोमिनेंस

  • लॉ ऑफ़ डोमिनेंस कहता है कि हेटेरोज़ाइगस कंडीशन में, एक अलील (डोमिनेंट) दूसरे (रिसेसिव) पर हावी होता है।
  • लॉ ऑफ़ डोमिनेंस के एक्सेप्शन हैं इनकंप्लीट डोमिनेंस और कोडोमिनेंस।

इनकंप्लीट डोमिनेंस

  • इनकंप्लीट डोमिनेंस में, हेटेरोज़ाइगस इंडिविजुअल में एक इंटरमीडिएट फेनोटाइप होता है।
  • उदाहरण: स्नैपड्रैगन के फूल (एंटीर्रिनम मेजस) में, लाल (कैपिटल R कैपिटल R) और सफेद (स्मॉल r स्मॉल r) फूलों के बीच क्रॉस करने पर गुलाबी (कैपिटल R स्मॉल r) फूल प्राप्त होते हैं।
  • इनकंप्लीट डोमिनेंस में फेनोटाइपिक और जीनोटाइपिक रेशो दोनों 1:2:1 होते हैं।

कोडोमिनेंस

  • कोडोमिनेंस में, हेटेरोज़ाइगस इंडिविजुअल में दोनों अलील समान रूप से एक्सप्रेस होते हैं।
  • उदाहरण: मानव रक्त समूह में, AB रक्त समूह में A और B दोनों एंटीजन एक्सप्रेस होते हैं।

डाईहाइब्रिड क्रॉस

  • डाईहाइब्रिड क्रॉस में, दो कैरेक्टर्स को एक साथ ध्यान में रखा जाता है।
  • उदाहरण: राउंड और येलो बीज (कैपिटल R कैपिटल R कैपिटल Y कैपिटल Y) को रिंकल्ड और ग्रीन बीज (स्मॉल r स्मॉल r स्मॉल y स्मॉल y) के साथ क्रॉस किया जाता है।
  • F2 पीढ़ी में फेनोटाइपिक रेशो 9:3:3:1 होता है।
  • डाईहाइब्रिड क्रॉस से लॉ ऑफ़ इंडिपेंडेंट असॉर्टमेंट का पता चलता है।

लॉ ऑफ़ इंडिपेंडेंट असॉर्टमेंट

  • लॉ ऑफ़ इंडिपेंडेंट असॉर्टमेंट कहता है कि विभिन्न कैरेक्टर्स के अलील स्वतंत्र रूप से एक दूसरे से अलग होते हैं।
  • डाईहाइब्रिड क्रॉस दो मोनोहाइब्रिड क्रॉसेस की तरह बिहेव करता है।

लॉ ऑफ़ सेग्रीगेशन

  • लॉ ऑफ़ सेग्रीगेशन कहता है कि युग्मक निर्माण के दौरान अलील अलग हो जाते हैं।
  • इसे लॉ ऑफ़ प्योरिटी ऑफ़ गेमेट्स भी कहा जाता है।

क्रोमोसोमल थ्योरी ऑफ़ इन्हेरिटेंस

  • सटन और बोवेरी ने क्रोमोसोमल थ्योरी ऑफ़ इन्हेरिटेंस का प्रस्ताव दिया।
  • यह थ्योरी कहती है कि जीन क्रोमोसोम पर स्थित होते हैं और इन्हेरिटेंस के दौरान क्रोमोसोम के साथ पास होते हैं।

पॉलीजेनिक इन्हेरिटेंस

  • पॉलीजेनिक इन्हेरिटेंस में, एक कैरेक्टर को कई जीनों द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • उदाहरण: मानव त्वचा का रंग और ऊंचाई।
  • मानव त्वचा के रंग को कम से कम तीन जीनों (A, B, और C) द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

प्लिओट्रॉपी

  • प्लिओट्रॉपी में, एक जीन कई फेनोटाइपिक एक्सप्रेशंस को प्रभावित करता है।
  • उदाहरण: मटर के बीज में स्टार्च सिंथेसिस।

लिंकेज एंड रिकॉम्बिनेशन

  • लिंकेज का मतलब है एक ही क्रोमोसोम पर स्थित जीनों की एक साथ इनहेरिटेड होने की प्रवृत्ति।
  • रिकॉम्बिनेशन का मतलब है नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच जेनेटिक मटेरियल का आदान-प्रदान।
  • लिंकेज और रिकॉम्बिनेशन एक दूसरे के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होते हैं।
  • मॉर्गन ने ड्रोसोफिला (फ्रूट फ्लाई) पर प्रयोग किए और लिंकेज और रिकॉम्बिनेशन की खोज की।
  • जेनेटिक मैप क्रोमोसोम पर जीनों की सापेक्ष स्थिति को दर्शाता है।
  • अल्फ्रेड स्टर्टवेंट ने जेनेटिक मैप तैयार किए।

सेक्स डिटरमिनेशन

  • हैकिंग ने पहली बार सेक्स डिटरमिनेशन का जिक्र किया।
  • मनुष्यों में, लिंग हेटेरोज़ाइगस सेक्स क्रोमोसोम (XY) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • पक्षियों में, लिंग हेटेरोज़ाइगस सेक्स क्रोमोसोम (ZW) द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • मधुमक्खियों में, लिंग हैप्लोइड-डिप्लोइड सिस्टम द्वारा निर्धारित किया जाता है।

म्यूटेशन

  • म्यूटेशन का मतलब है डीएनए सीक्वेंस में परिवर्तन।
  • म्यूटेशन फिजिकल या केमिकल म्यूटाजेंस के कारण हो सकता है।
  • सीकल सेल एनीमिया एक पॉइंट म्यूटेशन का उदाहरण है।
  • सीकल सेल एनीमिया में, हीमोग्लोबिन की बीटा ग्लोबिन चेन की छठी पोजीशन पर ग्लूटामिक एसिड की जगह वेलाइन आ जाता है।

जेनेटिक डिसऑर्डर्स

  • जेनेटिक डिसऑर्डर्स ऑटोसोमल या सेक्स-लिंक्ड हो सकते हैं।
  • ऑटोसोमल डिसऑर्डर्स ऑटोसोम पर जीन में म्यूटेशन के कारण होते हैं।
  • सेक्स-लिंक्ड डिसऑर्डर्स सेक्स क्रोमोसोम पर जीन में म्यूटेशन के कारण होते हैं।
  • एक्स-लिंक्ड रिसेसिव डिसऑर्डर्स क्रिस-क्रॉस पैटर्न दिखाते हैं।

पेडिग्री एनालिसिस

  • पेडिग्री एनालिसिस का मतलब है कई पीढ़ियों में एक परिवार में ट्रेट्स के पैटर्न का अध्ययन।
  • पेडिग्री एनालिसिस का उपयोग जेनेटिक डिसऑर्डर्स की इन्हेरिटेंस को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।

क्रोमोसोमल डिसऑर्डर्स

  • क्रोमोसोमल डिसऑर्डर्स क्रोमोसोम की संख्या या संरचना में असामान्यता के कारण होते हैं।
  • एनुप्लोइडी का मतलब है क्रोमोसोम की संख्या में असामान्यता।
  • पॉलीप्लोइडी का मतलब है क्रोमोसोम के पूरे सेट की संख्या में वृद्धि।
  • डाउन सिंड्रोम 21वें क्रोमोसोम की ट्राइसॉमी के कारण होता है।
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम पुरुषों में होता है और इसमें एक अतिरिक्त X क्रोमोसोम (XXY) होता है।
  • टर्नर सिंड्रोम महिलाओं में होता है और इसमें एक X क्रोमोसोम की कमी होती है (XO)।

निष्कर्ष

यह चैप्टर इन्हेरिटेंस और वेरिएशन के प्रिंसिपल्स को समझने के लिए एक व्यापक गाइड है। मेंडल के काम से लेकर आधुनिक जेनेटिक्स तक, यह चैप्टर जेनेटिक्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवधारणाओं और खोजों को शामिल करता है।

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