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Key Concepts
- विगनिज्म (Veganism) और बेरोजगारी (Unemployment)
- डेयरी उद्योग (Dairy Industry) और पशु क्रूरता (Animal Cruelty)
- प्लांट-बेस्ड फूड इंडस्ट्री (Plant-Based Food Industry)
- क्लाइमेट चेंज (Climate Change) और किसानों की आय (Farmers' Income)
- सब्सिडी (Subsidies) और सरकारी नीतियां (Government Policies)
- स्प्राउट्स (Sprouts) और माइक्रो ग्रीन्स (Microgreens) का व्यापार
विगनिज्म और डेयरी उद्योग पर प्रभाव
- रामू का उदाहरण: रामू का परिवार गायों के दूध बेचकर जीवन यापन करता है। अगर सब विगन हो जाएंगे तो रामू का परिवार कैसे चलेगा?
- डेयरी उद्योग से जुड़े परिवार: भारत में लगभग 7 करोड़ परिवार दूध के उद्योग से पैसे कमाते हैं। ग्रामीण परिवार की कुल इनकम का 1/3 हिस्सा दूध के उद्योग से आता है।
- मास जेनोसाइड का आरोप: डेयरी इंडस्ट्री को टारगेट करके करोड़ो किसानों का मास जेनोसाइड करने को प्रोत्साहन देने का आरोप।
तर्कों का विश्लेषण
- तंबाकू और चोरी का उदाहरण: तंबाकू के प्रोडक्ट बनाने वाले लोगों का घर चलाने के लिए सिगरेट पीना सही नहीं है। चोरी से किसी का घर चलता है तो चोरी को सपोर्ट करना सही नहीं है।
- पशु क्रूरता का व्यापार: कुछ परिवारों ने पशु क्रूरता को अपना व्यापार बना लिया है, तो इसका मतलब ये नहीं कि हम उसे सही ठहरा दें।
- नौकरियां और व्यवस्था में बदलाव: डीवीडी प्लेयर्स की इंडस्ट्री मोबाइल फोन और इंटरनेट के चलते खत्म हो गई। बदलाव जरूरी है।
- कसाइयों और दूध के व्यापारियों का डर: उन्हें पैसे कमाने हैं इसलिए जिस जानवर को मारने के लिए चुना है, वो भी जीना चाहता था। उन्हें डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
प्लांट-बेस्ड फूड इंडस्ट्री का उदय
- संजय का दृष्टिकोण: संजय एक फूड और एग्री बिजनेस एक्सपर्ट हैं, जिन्होंने भारत में प्लांट बेस्ड फूड इंडस्ट्री संगठन की स्थापना की है।
- प्लांट-बेस्ड इंडस्ट्री का विकास: मिल्क और मीट इंडस्ट्री 10 लाख लोगों से भी आगे पहुंच गई है।
- विगनिज्म का क्रमिक प्रभाव: विगनिज्म रातों रात इन इंडस्ट्रीज को खत्म नहीं करने वाला। लोग धीरे-धीरे ही विगन बनेंगे।
क्लाइमेट चेंज का प्रभाव
- क्लाइमेट चेंज से नुकसान: क्लाइमेट चेंज के कारण पूरे भारत देश को हर साल 10 अरब रुपयों का नुकसान हो रहा है। किसानों की आय 20 से 25% तक गिरने वाली है।
- एनिमल हसबेंडरी का योगदान: दुनिया भर के वैज्ञानिकों का कहना है कि आज की तारीख में एनिमल हसबेंडरी पूरी पृथ्वी को तबाह कर रही है।
- किसानों पर प्रभाव: एनिमल प्रोडक्ट्स के कारण किसानों की आय कम होने वाली है और क्लाइमेट चेंज का नुकसान इन्हें सबसे ज्यादा भुगतना पड़ेगा।
- Push to Extreme Poverty Due to Repeated Drought Years, Manoj 60000 Farmers in India.
विकल्पों की तलाश
- भोजन की आवश्यकता: कोई चीज एक कहानी कम होती है तो हम खाना खाना तो बंद नहीं करने वाले ना, खाना तो खाना ही है।
- प्लांट-बेस्ड विकल्प: पौधों से बना दूध, दही, घी और दूसरे प्रोडक्ट्स।
- प्लांट-बेस्ड इंडस्ट्री का विकास: 5-10 साल में 40000 करोड़ की इंडस्ट्री ग्रोथ है।
- किसानों को फायदा: सोयाबीन, मूंगफली और नारियल के दूध की इंडस्ट्री सोयाबीन, मूंगफली और नारियल उगाने वाले किसानों को सीधे-सीधे फायदा पहुंचाएगी।
- छोटे स्तर पर व्यापार: मक्के से दूध बनाने की मशीन का उदाहरण। लोग खुद ही सोयाबीन और नारियल का दूध बनाकर भेज रहे हैं।
सरकारी सब्सिडी और नीतियां
- सब्सिडी का प्रभाव: भारत में दूध और मांस की इंडस्ट्री सिर्फ और सिर्फ इसलिए चल रही है क्योंकि सरकार इनको ढेर सारी सब्सिडीज और आसान लोन देती है।
- नाबार्ड लोन: नाबार्ड की तरफ से 20 लाख रुपए तक का लोन और दो जानवर रखने पर 25 से 30 हजार तक की सब्सिडी दी जाती है।
- कसाई खाने को सब्सिडी: मिनिस्ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज ने कसाई खाने के लिए 2012 से 2016 तक 4 सालों में 71 करोड़ की सब्सिडी दी थी।
- टैक्स में छूट: सरकार दूध, मांस और अंडे वगैरा पर टैक्स में भी कई प्रकार की छूट देती है।
- जीएसटी का मुद्दा: प्लांट बेस्ड प्रोडक्ट्स पर जीएसटी।
विजन इंडस्ट्रीज को बढ़ावा
- बदलाव की नीयत: अगर यही पैसे सरकार विजन इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने में लगा है, तो आप खुद ही सोच सकते हैं कि कितनी तेजी से कितना सही बदलाव आ सकता है।
- स्प्राउट्स और माइक्रो ग्रीन्स: स्प्राउट्स और माइक्रो ग्रीस के व्यापार का भविष्य में बहुत अच्छा स्कोप है।
- कम लागत, ज्यादा मुनाफा: शुरुआती खर्च ₹1 लाख से भी कम का है इस पर मुनाफा बढ़िया है ऑस्टिन हर महीने में 40 से 50000 रुपए तक काम लेता हूं।
निष्कर्ष
- रामू का उदाहरण: रामू जी दूध के बजाए स्प्राउट्स और माइक्रो ग्रीन शहर तक ले जाते हैं और उससे अच्छा मुनाफा कमाता है।
- लॉजिक का खंडन: एनिमल प्रोडक्ट्स खरीदने और उन्हें खाने के पीछे का जो लॉजिक है कि अगर हमने बेरोजगार हो जाएंगे वो पूरी तरीके से गलत है।
- बेरोजगारी नहीं बढ़ेगी: एनिमल प्रोडक्ट्स खरीदने से बेरोजगारी तो नहीं बढ़ाएगी लेकिन ये जरूर है कि वो करोड़ जानवरों को हर साल मारने से और हमारे आने वाले पीडिया को क्लाइमेट चेंज जैसी महामारी में से बचा सकता है।
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