Transforming Horticulture in India | Mr. Sudhir Chadha | TEDxSGRR

TEDx TalksAbout 4 min readJun 30, 2025Watch original
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Key Concepts

  • हॉर्टिकल्चर (बागवानी) में 40 वर्षों का अनुभव
  • फार्मर इनकम (किसान आय) को 10-20 गुना बढ़ाना
  • पपीते की खेती (Papaya Farming) की सबट्रॉपिकल ज़ोन (Subtropical Zone) में संभावना
  • क्रॉस ब्रीडिंग (Cross Breeding) और स्ट्रेन लाइंस (Strain Lines) का निर्माण
  • ड्वार्फ पपाया (Dwarf Papaya) की ब्रीडिंग (Breeding)
  • पॉली हाउस (Poly House) तकनीक
  • ग्रीन हाउस रिवोल्यूशन (Green House Revolution)
  • मैचिंग ग्रांट (Matching Grant) पॉलिसी
  • फ्लावर बल्ब्स फोर्सिंग टेक्नोलॉजी (Flower Bulbs Forcing Technology)
  • टॉल स्पिंडल मेथड (Tall Spindle Method) से सेब की खेती
  • हाई डेंसिटी प्लांटेशन सिस्टम (High Density Plantation System)
  • सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Center of Excellence)
  • क्लस्टर प्रोग्रामिंग (Cluster Programming)

हॉर्टिकल्चर में 40 वर्षों का अनुभव और प्रेरणा

लेखक अपने हॉर्टिकल्चर में बिताए 40 वर्षों के अनुभव को साझा करते हैं, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रेरित करना है। उन्होंने दिल्ली में हायर सेकेंडरी करने के बाद मेडिकल में सिलेक्शन होने पर भी गांव में रहकर खेती करने का फैसला किया।

फार्मर इनकम बढ़ाने की चुनौती और पपीते की खेती

लेखक ने महसूस किया कि पारंपरिक खेती (गेहूं, धान, चना) से किसानों की आय बहुत कम है (लगभग ₹1500-₹2000)। उन्होंने किसान आय को 10-20 गुना बढ़ाने के लिए पपीते की खेती की संभावना तलाशी। यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसे ट्रॉपिकल फसल बताकर सबट्रॉपिकल ज़ोन में कमर्शियल खेती के लिए उपयुक्त नहीं माना।

क्रॉस ब्रीडिंग और स्ट्रेन लाइंस का निर्माण

लेखक ने हार नहीं मानी और क्रॉस ब्रीडिंग के माध्यम से पपीते की नई प्रजातियां विकसित करने का निर्णय लिया। उन्होंने डॉक्टर हरिराम से मदद ली और हिंदुस्तान में मौजूद सभी प्रजातियों का कलेक्शन किया। क्रॉस ब्रीडिंग से सेग्रगेटेड कररेक्टर्स (Segregated Characters) बाहर आए, जिनसे स्ट्रेन लाइंस (Strain Lines) बनाई गईं। 70 स्ट्रेन लाइंस बनाने के बाद, उन्हें ऐसे कररेक्टर्स मिले जो सबट्रॉपिकल क्लाइमेट में भी अच्छे से विकसित हो सकते थे।

ड्वार्फ पपाया की ब्रीडिंग और सफलता

लेखक ने ब्रीडिंग के माध्यम से ड्वार्फ पपाया (Dwarf Papaya) को इस क्लाइमेट के लिए अडॉप्टिव (Adaptive) बनाया। इस सफलता को इंडिया टुडे ने कवर किया और लेखक को "पपाया मैन ऑफ इंडिया" कहा जाने लगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उत्तर भारत में पपीते की कमर्शियल खेती शुरू हो गई और हजारों किसानों ने इसे अपनाया।

नीदरलैंड में एक्सपोज़र और पॉली हाउस तकनीक

लेखक का एफएओ (FAO) में सिलेक्शन हुआ और उन्हें नीदरलैंड जाने का अवसर मिला। वहां उन्होंने रोबोटिक खेती, ऑटोमेशन बेस्ड खेती और आर्टिफिशियल क्लाइमेट में खेती देखी। उन्होंने एक ऐसे खेत को देखा जहां एक दिन में 10,000 लेट्यूस क्रॉप लगती है और 10,000 हार्वेस्ट होती है। इससे उन्हें प्रेरणा मिली कि क्लाइमेट को कंट्रोल करके किसी भी फसल को जब चाहे उगाया और हार्वेस्ट किया जा सकता है।

ग्रीन हाउस रिवोल्यूशन और मैचिंग ग्रांट पॉलिसी

भारत लौटने पर, लेखक ने कुमाऊं मंडल विकास निगम के साथ पार्टनरशिप करके प्लांटेक्ट एस्टैब्लिश किया और 200 पॉली हाउस लगाए। इससे कुमायूं में ग्रीन हाउस रिवोल्यूशन (Green House Revolution) आ गया। उन्होंने एटीआई (ATI) में नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (National Horticulture Board) की स्कीम्स पर मैचिंग ग्रांट (Matching Grant) पॉलिसी लागू करने का सुझाव दिया, जिससे उत्तराखंड में हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा मिला।

फ्लावर बल्ब्स फोर्सिंग टेक्नोलॉजी

लेखक ने नीदरलैंड से फ्लावर बल्ब्स फोर्सिंग टेक्नोलॉजी (Flower Bulbs Forcing Technology) सीखी और भारत में लिलियम (Lilium), ग्लैडियोलस (Gladiolus) और ट्यूलिप (Tulip) के बल्ब्स का उत्पादन शुरू किया। इससे उत्तराखंड की वैली फ्लावर वैली में कन्वर्ट हो गई और मुंशारी में बेस्ट ट्यूलिप गार्डन बना।

टॉल स्पिंडल मेथड से सेब की खेती

लेखक ने नीदरलैंड में डाइक (Dike) पर टॉल स्पिंडल मेथड (Tall Spindle Method) से सेब की खेती देखी और इसे भारत लाने का फैसला किया। उन्होंने एक डच विशेषज्ञ को भारत बुलाया और इस तकनीक को सिखा। बाद में, इटली में उन्होंने टॉल स्पिंडल मेथड के बारे में और जानकारी प्राप्त की।

हाई डेंसिटी प्लांटेशन सिस्टम और उन्नति एप्पल प्रोजेक्ट

लेखक ने कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड के किसानों को हाई डेंसिटी प्लांटेशन सिस्टम (High Density Plantation System) के बारे में बताया। उन्हें उन्नति एप्पल प्रोजेक्ट (Unnati Apple Project) के तहत 100 किसानों के साथ काम करने का अवसर मिला। पुरोला में विजेंद्र जी के खेत में पहली फसल ₹119,000 की हुई। पूनम नामक एक महिला किसान ने ढाई लाख का टमाटर बेचा।

समाज के लिए संकल्प और क्लस्टर प्रोग्रामिंग

दिल्ली में एक सेमिनार में उत्तराखंड से पलायन की फिल्म देखकर लेखक ने समाज के लिए काम करने का संकल्प लिया। उन्होंने 2000 से ज्यादा बगीचे लगाए। नीति आयोग में उन्होंने फ्रूट के पॉकेट्स (Fruit Pockets) डेवलप करने का सुझाव दिया, जिसे बाद में क्लस्टर प्रोग्रामिंग (Cluster Programming) के रूप में लागू किया गया।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में हॉर्टिकल्चर के विकास के लिए बेहतर प्लांटिंग मटेरियल, टेक्नोलॉजी, तकनीक का प्रसार, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और पॉलिसी की आवश्यकता है। लेखक का मानना है कि इन प्रयासों से प्रदेश का विकास होगा।

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