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अंडे उद्योग का छिपा हुआ सच
मुख्य अवधारणाएँ:
- अंडे उद्योग के क्रूर पहलू
- मुर्गियों का शोषण
- बैटरी पिंजरे
- नर चूजों का वध
- चोंच काटना (डीबीकिंग)
- अंडे के उत्पादन के विकल्प
1. अंडे के बारे में प्रचलित झूठी मान्यताएँ और सच्चाई:
- मान्यता: मुर्गी स्वाभाविक रूप से अंडे देती है, इसलिए अंडे लेने में कोई बुराई नहीं है।
- सच्चाई: मुर्गियाँ प्राकृतिक रूप से साल में केवल 10-12 अंडे देती हैं। सिलेक्टिव ब्रीडिंग के माध्यम से, उन्हें साल में 250-300 अंडे देने के लिए मजबूर किया जाता है।
- तथ्य: एक अंडा देने के लिए मुर्गी को अपने शरीर का 10% कैल्शियम खर्च करना पड़ता है। 300 अंडे देने के लिए, उसे 30 गुना अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों का टूटना हो सकता है।
2. मुर्गियों की समझदारी और उनके साथ व्यवहार:
- मान्यता: मुर्गियाँ बेवकूफ होती हैं।
- सच्चाई: मुर्गियाँ जिज्ञासु, सामाजिक प्राणी हैं जो दोस्तियाँ और दुश्मनी करती हैं, इंसानों के चेहरे पहचान सकती हैं, छुपी हुई चीजें ढूंढ सकती हैं और गिनती भी कर सकती हैं। वे 30 से अधिक प्रकार की आवाजों से संवाद करती हैं और कुत्तों की तरह तरकीबें सीख सकती हैं।
- व्यवहार: उन्हें छोटे पिंजरों में ठूंस दिया जाता है जहाँ वे अपने पंख भी नहीं फैला सकतीं। उन्हें प्राकृतिक व्यवहार जैसे पेड़ की शाखाओं पर बैठना, चोंच मारना और मिट्टी में लौटना करने की अनुमति नहीं है।
3. बैटरी पिंजरों की समस्याएँ:
- परिस्थिति: 5-7 मुर्गियाँ या उससे भी अधिक एक छोटे से पिंजरे में बंद।
- परिणाम:
- चलना-फिरना मुश्किल, जीवन भर अपने पंख नहीं फैला पातीं।
- तारों के फर्श पर खड़े रहने से पैरों में दर्द और घाव।
- पंजा मुड़ जाते हैं और नाखून बड़े हो जाते हैं।
- गंदगी और भीड़ के कारण अमोनिया जैसी जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जिससे आँखों में संक्रमण और श्वसन संबंधी समस्याएँ होती हैं।
- भारत में 90% से अधिक अंडे बैटरी पिंजरों में पली मुर्गियों द्वारा दिए जाते हैं।
4. फर्टिलाइज्ड अंडे का उत्पादन:
- मुर्गों से स्पर्म इकट्ठा किया जाता है और मुर्गियों को इंजेक्शन से फर्टिलाइज किया जाता है।
- अंडों को इनक्यूबेटरों में रखा जाता है और 21 दिन बाद चूजे पैदा होते हैं।
- चूजों को अपनी माँ से अलग कर दिया जाता है और उनके रिप्रोडक्टिव ऑर्गन को दबाकर उनका मल बाहर निकाला जाता है ताकि लिंग का पता चल सके।
5. नर चूजों का वध:
- कारण: नर चूजे अंडे नहीं देते और मांस के लिए उपयोगी नहीं होते।
- तरीके: ग्राइंडर में पीसना, कुचल देना, पानी में डुबा देना, प्लास्टिक की थैलियों में भरकर दम घुटना, मछली के खाने के लिए डाल देना और जिंदा जला देना।
- आंकड़े: पूरी दुनिया में हर साल 7 अरब चूजे मार दिए जाते हैं, यानी हर सेकंड 250 चूजे।
6. चोंच काटना (डीबीकिंग):
- कारण: पिंजरों में तनाव के कारण मुर्गियाँ एक-दूसरे को चोट मारती हैं, जिससे अंडे का उत्पादन कम हो जाता है।
- प्रक्रिया: छोटी मुर्गियों की चोंच लाल गर्म या तेज ब्लेड से काट दी जाती है।
- परिणाम:
- चोंच में नशे होने के कारण दर्द।
- सूजन और दर्द के कारण खाना-पीना छोड़ देना और भूख-प्यास से मर जाना।
- शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, नींद बढ़ जाती है और खाना कम खाती हैं।
7. मुर्गियों का जीवन चक्र और कसाईखाना:
- मुर्गियाँ 1.5-2 साल तक अंडे देती हैं, फिर उन्हें कसाईखाने भेज दिया जाता है।
- कमजोर हड्डियों के कारण परिवहन के दौरान कई मुर्गियाँ घायल हो जाती हैं या मर जाती हैं।
- प्राकृतिक रूप से 10 साल से अधिक जीने वाले पक्षियों को अंडे उद्योग में 1.5-2 साल में मार दिया जाता है।
8. अंडे की कीमत:
- अंडे की कीमत मुर्गियों के साथ जबरदस्ती, चूजों को उनकी माँ से अलग करने, चोंच काटने, छोटे पिंजरों में रखने और उनकी हड्डियों से कैल्शियम निकालने से शुरू होती है।
- ₹5 के मार्जिन के साथ, कम खर्चे में मुर्गियों से अधिक अंडे प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
9. अंडे के विकल्प:
- प्रोटीन के लिए सोयाबीन और राजमा बेहतर विकल्प हैं।
- कैल्शियम के लिए हरी सब्जियां, तिल और रागी उपलब्ध हैं।
10. निष्कर्ष:
अंडे उद्योग में मुर्गियों के साथ क्रूर व्यवहार किया जाता है। अंडे के पौष्टिक होने की धारणा के बावजूद, पौधों पर आधारित विकल्प अधिक टिकाऊ और नैतिक हैं। लोगों को इस सच्चाई के बारे में जागरूक होना चाहिए और अंडे खाने से होने वाली क्रूरता का समर्थन करने से बचना चाहिए।
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