Recharge Chapter 11 | Foreign Exchange rate | Class 12 | Boards 2025

Rajat AroraAbout 4 min readMar 18, 2025Watch original
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Key Concepts

  • फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange)
  • फॉरेन एक्सचेंज रेट (Foreign Exchange Rate)
  • करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency Depreciation)
  • करेंसी एप्रिसिएशन (Currency Appreciation)
  • फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम (Fixed Exchange Rate System)
  • फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट सिस्टम (Flexible Exchange Rate System)
  • मैनेज फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट सिस्टम (Managed Floating Exchange Rate System)
  • डीवैल्युएशन (Devaluation)
  • रिवैल्युएशन (Revaluation)
  • इक्विलियम एक्सचेंज रेट (Equilibrium Exchange Rate)
  • स्पॉट मार्केट (Spot Market)
  • फॉरवर्ड मार्केट (Forward Market)

फॉरेन एक्सचेंज और फॉरेन एक्सचेंज रेट

  • फॉरेन एक्सचेंज: किसी देश की डोमेस्टिक करेंसी को छोड़कर बाकी सभी करेंसीज फॉरेन एक्सचेंज कहलाती हैं।
  • फॉरेन एक्सचेंज रेट: वह रेट जिस पर एक करेंसी को दूसरी करेंसी के लिए एक्सचेंज किया जाता है। उदाहरण के लिए, डॉलर खरीदने के लिए 85-86 रुपये देने पड़ते हैं।

करेंसी डेप्रिसिएशन और एप्रिसिएशन

  • डेप्रिसिएशन: डोमेस्टिक करेंसी की वैल्यू कम होना। इससे एक्सपोर्ट्स बढ़ते हैं, इंपोर्ट्स कम होते हैं, और नेशनल इनकम बढ़ती है।
  • एप्रिसिएशन: डोमेस्टिक करेंसी की वैल्यू बढ़ना। इससे इंपोर्ट्स बढ़ते हैं, एक्सपोर्ट्स कम होते हैं, और नेशनल इनकम कम होती है।

एक्सचेंज रेट सिस्टम्स

  • फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम:
    • एक्सचेंज रेट सरकार द्वारा फिक्स किया जाता है, या तो गोल्ड की टर्म्स में या किसी और फॉरेन करेंसी की टर्म्स में।
    • फायदे: स्टेबिलिटी, इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट, आसान इंटरनेशनल ट्रेड, स्पेक्युलेटिव एक्टिविटी से बचाव, मैक्रो इकोनॉमिक्स पॉलिसीज में बेहतर कोऑर्डिनेशन।
    • नुकसान: बहुत सारे रिजर्व्स की जरूरत, फिक्स करना मुश्किल हो सकता है।
  • फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट सिस्टम:
    • एक्सचेंज रेट मार्केट फोर्सेस (डिमांड और सप्लाई) से फिक्स होता है।
    • फायदे: इक्विलियम लेवल मेंटेन रहता है, फंड रिजर्व्स की जरूरत नहीं है, रिसोर्सेज का प्रॉपर यूटिलाइजेशन।
    • नुकसान: अस्थिर, स्पेक्युलेटिव, इंफ्लेशन का खतरा।
  • मैनेज फ्लोटिंग एक्सचेंज रेट सिस्टम:
    • एक्सचेंज रेट मार्केट फोर्सेस से फिक्स होता है, लेकिन आरबीआई थोड़ा बहुत ऊपर नीचे कर सकता है एक्सचेंज रेट को ताकि डिजायर्ड टारगेट वैल्यूज के क्लोज रहे।

डीवैल्युएशन और रिवैल्युएशन

  • डीवैल्युएशन: फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम के तहत सरकार द्वारा करेंसी की वैल्यू कम करना। 1991 की न्यू इकोनॉमिक पॉलिसी में सरकार ने अपनी करेंसी की वैल्यू खुद से डीवैल्यू करी थी।
  • रिवैल्युएशन: फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम के तहत सरकार द्वारा करेंसी की वैल्यू बढ़ाना।
  • अंतर: डेप्रिसिएशन और एप्रिसिएशन फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट सिस्टम में होते हैं, जबकि डीवैल्युएशन और रिवैल्युएशन फिक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम में होते हैं।

डिमांड और सप्लाई के रीजंस

  • डिमांड के रीजंस: इंपोर्ट करना, बाहर घूमने जाना, यूनिलैटरल ट्रांसफर (गिफ्ट्स), विदेश में एसेट खरीदना, स्पेक्युलेटिंग, इंटरनेशनल लोन चुकाना।
  • सप्लाई के रीजंस: एक्सपोर्ट करना, इन्वेस्टमेंट मिलना, गिफ्ट्स आना, लोन फ्रॉम रेस्ट ऑफ द वर्ल्ड, ग्रांट्स डोनेशंस आना।

इक्विलियम एक्सचेंज रेट

  • वह रेट जहां पर डिमांड बराबर हो सप्लाई के। यह डिमांड और सप्लाई के इंटरसेक्शन पॉइंट पर निर्धारित होता है।

डिमांड और सप्लाई में बदलाव का रेट पर प्रभाव

  • डिमांड: डिमांड बढ़ने से रेट बढ़ता है, डिमांड कम होने से रेट कम होता है। सामान्य रिलेशनशिप इवर्स होता है।
  • सप्लाई: सप्लाई बढ़ने से रेट कम होता है, सप्लाई कम होने से रेट बढ़ता है। सामान्य रिलेशनशिप डायरेक्ट होता है।

फॉरेन एक्सचेंज मार्केट

  • वह मार्केट जहां पर फॉरेन एक्सचेंज की सेल परचेस होती है।
  • स्पॉट मार्केट: ऑन द स्पॉट ट्रांजैक्शन।
  • फॉरवर्ड मार्केट: रेट आज डिसाइड कर लो, ट्रांजैक्शन फ्यूचर में कर लेंगे।

डिफरेंसेस

  • डेप्रिसिएशन और एप्रिसिएशन: वैल्यू कम होना (डेप्रिसिएशन) बनाम वैल्यू बढ़ना (एप्रिसिएशन) डोमेस्टिक करेंसी की। डेप्रिसिएशन से एक्सपोर्ट बढ़ते हैं, एप्रिसिएशन से इंपोर्ट बढ़ते हैं।
  • डीवैल्युएशन और डेप्रिसिएशन: दोनों का मतलब वैल्यू कम होना है, लेकिन डीवैल्युएशन फिक्स्ड सिस्टम में होता है और डेप्रिसिएशन फ्लेक्सिबल सिस्टम में।
  • फिक्स्ड और फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट: डिटरमिनेशन, गवर्नमेंट कंट्रोल, स्टेबिलिटी, फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स की जरूरत, वैल्यू में बदलाव को क्या कहा जाता है।

सिनोनिम्स

  • फिक्स्ड = पेक्ड
  • फ्लेक्सिबल = फ्लोटिंग
  • मैनेज फ्लोटिंग = डर्टी फ्लोटिंग
  • डिमांड = आउटफ्लो
  • सप्लाई = इनफ्लो

Synthesis/Conclusion

यह चैप्टर फॉरेन एक्सचेंज रेट के विभिन्न पहलुओं को कवर करता है, जिसमें फॉरेन एक्सचेंज क्या है, एक्सचेंज रेट कैसे निर्धारित होता है, और विभिन्न एक्सचेंज रेट सिस्टम्स के फायदे और नुकसान क्या हैं। यह करेंसी डेप्रिसिएशन और एप्रिसिएशन, डीवैल्युएशन और रिवैल्युएशन, और डिमांड और सप्लाई के कारकों के बीच अंतर को भी स्पष्ट करता है। यह जानकारी इंटरनेशनल ट्रेड और फाइनेंस को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

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