How India's arkestra dancing shows exploit minors | DW News
By DW News
ऑर्केस्ट्रा: भारत के ग्रामीण मेलों में महिलाओं का जीवन और संघर्ष
मुख्य अवधारणाएँ:
- ऑर्केस्ट्रा (Orchestra): भारत के ग्रामीण क्षेत्रों, विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय, लाइव संगीत और नृत्य प्रदर्शन। इन्हें अक्सर "थिएटर" भी कहा जाता है, हालांकि ये पारंपरिक थिएटर से अलग हैं।
- ग्रामीण मेला (Rural Fair): जैसे सोनपुर मेला, बिहार, जो भारत के सबसे बड़े ग्रामीण पशु मेलों में से एक है और ऑर्केस्ट्रा प्रदर्शनों का केंद्र है।
- मानव तस्करी (Human Trafficking): गरीब परिवारों से नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा में काम करने के लिए मजबूर करने की अवैध प्रथा।
- सामाजिक कलंक (Social Stigma): ऑर्केस्ट्रा में काम करने वाली महिलाओं के प्रति समाज का नकारात्मक दृष्टिकोण, जो उन्हें बहिष्कार और शोषण के प्रति संवेदनशील बनाता है।
- भोजपुरी संगीत (Bhojpuri Music): इस क्षेत्र में लोकप्रिय संगीत शैली, जो अक्सर कामुक और स्त्री विरोधी होती है।
1. ऑर्केस्ट्रा का परिदृश्य और लोकप्रियता
भारत के ग्रामीण इलाकों में ऑर्केस्ट्रा एक लोकप्रिय मनोरंजन का साधन है, खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में। सोनपुर मेला जैसे मेलों में ऑर्केस्ट्रा प्रदर्शन मुख्य आकर्षण होते हैं। टिकट की कीमतें 1 रुपये से लेकर 15 रुपये तक होती हैं, जो दर्शकों की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती हैं। ऑर्केस्ट्रा प्रदर्शनों में अक्सर कामुक नृत्य और संगीत शामिल होता है, जो मुख्य रूप से पुरुषों को आकर्षित करता है। एक दर्शक का कहना है, "ऑर्केस्ट्रा का बात करें तो लौंडिया नाचती है सब लड़कियां नाचती है जैसे हम लोग शादी ब्याह में कैसे नचवाते हैं लड़कियां को डांस वांस कर रहे हैं अपना मतलब जो भी अपने अंदर का जो हुनर है दिखा दिखा रही है पब्लिक को।"
2. ऑर्केस्ट्रा में महिलाओं का जीवन
ऑर्केस्ट्रा में काम करने वाली महिलाएं अक्सर गरीबी और सामाजिक दबावों का सामना करती हैं। कई महिलाएं अवैध रूप से तस्करी का शिकार होती हैं और उन्हें काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। अवनी चौधरी (24 वर्ष) की कहानी बताती है कि कैसे वह बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश से बिहार में एक ऑर्केस्ट्रा में काम करने आई। शुरू में, उसे डर था और रोने जैसा मन कर रहा था, लेकिन धीरे-धीरे वह इस काम में ढल गई। "पहले तो अंदर-अंदर पब्लिक को देख के ना इतना डर था। रोने जैसा मन कर रहा था।"
3. जोखिम और शोषण
ऑर्केस्ट्रा में काम करना महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्हें दर्शकों द्वारा यौन उत्पीड़न, हमले और यहां तक कि हत्या का भी खतरा होता है। अवनी चौधरी ने बताया कि कैसे एक बार उसके साथ हमला हुआ था जब वह मंच पर प्रदर्शन कर रही थी। "उस टाइम यह हुआ था कि मैं डांस कर रही थी और मैंने स्कर्ट पहना हुआ था और ऊपर जो हम लोग पहनते हैं शॉर्ट ही कपड़ा था वो पहनी हुई थी तो मुझे कोई ऐसे ही इनाम दिया दे रहा था कंटिन्यू वो मेरे गाने पे नाम दे रहा था।" पुलिस ने कई नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा से बचाया है और इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
4. सामाजिक कलंक और बहिष्कार
ऑर्केस्ट्रा में काम करने वाली महिलाओं को अक्सर समाज में कलंकित और बहिष्कृत किया जाता है। ईरा कुमारी (नाम बदला गया) नामक एक नाबालिग लड़की को पुलिस ने एक रेड में बचाया था। वह बताती है कि उसके परिवार को समाज में अपमानित किया गया। "मेरा भाई को बोल दिए छोटा है ना 13 साल का है तो वो मम्मी को बताया तो मम्मी थोड़ा रोने लगी दो दिन से बता रहे हैं तो नहीं आना चाह रही है क्योंकि मतलब होता है मां तो जात में इज्जत रहता है ना तो बोलता है तुमने मेरा इज्जत डूबा दिया ये कर दिया वो कर दिया गांव में पता चलेगा घर से निकाल देगा तो इसलिए मम्मी रो रही थी।"
5. गरीबी और मजबूरी
ऑर्केस्ट्रा में काम करने वाली कई महिलाएं गरीबी और मजबूरी के कारण इस पेशे में आती हैं। रीना कुमारी (नाम बदला गया) नामक एक अन्य नाबालिग लड़की बताती है कि उसके पिता की मृत्यु हो गई और उसे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए काम करना पड़ा। "मेरे पापा 10 साल हो गया नहीं आए घर। खर्चा में चलाते हैं। मेरी बड़ी बहन थी। इसी लाइन में काम करके उसके शादी किए हैं और घर का खर्चा चलाते हैं।"
6. सांस्कृतिक और सामाजिक पहलू
ब्रह्मा प्रकाश, एक सांस्कृतिक टिप्पणीकार, का कहना है कि ऑर्केस्ट्रा प्रदर्शनों में कामुकता और वासना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। "इट इज़ द इरोटिक इट इज़ द लिबिडनल इट इज़ द व्गर दैट इज़ एबल टू मेक सम काइंड्स ऑफ़ एक्सेसिबिलिटी हैज़ सम काइंड्स ऑफ़ एक्सेसिबिलिटी दैट गेट्स मोर सर्कुलेटेड।" भोजपुरी संगीत, जो इस क्षेत्र में लोकप्रिय है, अक्सर कामुक और स्त्री विरोधी होता है।
7. पुलिस और एनजीओ की भूमिका
पुलिस और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) मानव तस्करी और शोषण को रोकने के लिए काम कर रहे हैं। पुलिस ने कई रेड किए हैं और नाबालिग लड़कियों को बचाया है। एनजीओ पीड़ितों को पुनर्वास और परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं। पुलिस का कहना है कि उन्होंने पिछले साल से अब तक 279 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया है।
8. अस्मा की कहानी: सफलता और संघर्ष
अस्मा, जो पहले एक नाबालिग थी, अब 26 वर्ष की है और एक सफल ऑर्केस्ट्रा डांसर है। उसने अपनी प्रतिभा से अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकाला और एक घर बनाया। हालांकि, उसे अभी भी समाज में कलंक का सामना करना पड़ता है। "यार यहां अच्छा नजर से देखता नहीं जितना भी बड़ा डांसर हो वो लोग गलत बोलेगी नचने वाली है ये वो ये।"
9. अवनी चौधरी का भविष्य
अवनी चौधरी, ऑर्केस्ट्रा में काम करना जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। वह इस पेशे में जीवित रहने और सफल होने के तरीके सीख गई है। "काम करके मुझे यहां से बहुत कुछ मिला है। मैंने बहुत कुछ पाया है यहां से। थोड़ा मम्मी पापा से दूर तो रही हूं लेकिन मुझे यहां से बहुत कुछ भी मिला है और मेरी लगन इतनी हो गई इसमें कि मैं यह बिहार छोड़ के नहीं जा पाई और मैं इस काम में इतनी ढल गई कि अभी मुझे इसकी आदत हो गई।"
निष्कर्ष:
ऑर्केस्ट्रा भारत के ग्रामीण इलाकों में एक जटिल और विवादास्पद दुनिया है। यह महिलाओं के लिए जीवित रहने और सफल होने का एक साधन हो सकता है, लेकिन यह शोषण और सामाजिक कलंक का भी स्रोत है। इस समस्या को हल करने के लिए गरीबी, मानव तस्करी और सामाजिक असमानता को संबोधित करने की आवश्यकता है।
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