From Housewife to Himalayan Heights | Jyoti Ratre | TEDxTechnocrats Institute Of Technology
By TEDx Talks
Key Concepts:
- आत्म-खोज (Self-discovery)
- दृढ़ता (Perseverance)
- जिम्मेदारी (Responsibility)
- सपना (Dream)
- माउंट एवरेस्ट (Mount Everest)
- पल्मोनरी एडिमा (Pulmonary Edema)
- डीएनए टेस्ट (DNA Test)
- वेदर विंडो (Weather Window)
- डेथ जोन (Death Zone)
- अल्ट्रा रनर (Ultra Runner)
प्रारंभिक जीवन और व्यवसाय:
ज्योति रात्रे मध्य प्रदेश के एक छोटे शहर में पली-बढ़ीं और 18 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच, उन्होंने एक व्यवसाय शुरू किया जो 200 लोगों को रोजगार दे रहा है। उन्हें एक अंतर्राष्ट्रीय फैशन शो करने का मौका मिला, लेकिन बाद में उन्होंने अकेलापन महसूस किया क्योंकि बच्चे अपने करियर में व्यस्त थे और पति अपने काम में।
पहाड़ों से प्यार और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ:
2017 में, ज्योति ने पहली बार पहाड़ों को देखा और उन्हें उनसे प्यार हो गया। पहाड़ों से लौटने के बाद, उन्हें पल्मोनरी एडिमा हो गया, और डॉक्टरों ने उन्हें पहाड़ों पर जाने से मना कर दिया। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और भारत के सबसे कठिन ट्रैक, पिन पार्वती ट्रैक (100 किमी लंबा और 5630 मीटर ऊंचा) को सफलतापूर्वक पूरा किया।
माउंट एवरेस्ट का सपना और तैयारी:
49 साल की उम्र में, ज्योति ने माउंट एवरेस्ट फतह करने का सपना देखा। उन्होंने एक डीएनए टेस्ट करवाया, जिसमें उनके फेफड़े कमजोर पाए गए। उन्होंने अपनी कमजोरियों पर काम किया और इंटरनेट के माध्यम से ट्रेनिंग के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने 5-6 घंटे की एक्सरसाइज के लिए समय निकाला और 10-12 किलो की जैकेट पहनकर घर के काम किए।
ट्रेनिंग और कोविड-19:
माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग के लिए, उन्होंने अलग-अलग तरह के पहाड़ों को चुना। कोविड-19 महामारी उनके लिए एक अवसर की तरह आई, और उन्होंने इस दौरान अपने लिए काफी काम किया। अक्टूबर में, उन्होंने अपना पहला पहाड़, देव टब्बा फतह किया, जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिला।
एल्ब्रस और रिकॉर्ड:
अगला पड़ाव एल्ब्रस (यूरोप की सबसे ऊंची चोटी) था, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक फतह किया। 52 साल की उम्र में, वह माउंट एल्ब्रस फतह करने वाली भारत की सबसे उम्रदराज महिला बनीं।
जिम्मेदारियाँ और माउंट एवरेस्ट के लिए पहली कोशिश:
2022 में, ज्योति माउंट एवरेस्ट जाने के लिए तैयार थीं, लेकिन उनकी बेटी की शादी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने पहले अपनी जिम्मेदारी पूरी की और 2023 में माउंट एवरेस्ट के लिए निकल गईं। बेस कैंप के बाद, कुंभू आइस फॉल को पार करना बहुत कठिन था। कैंप वन और कैंप टू में दो रोटेशन किए गए ताकि शरीर उस ऊंचाई के अनुकूल हो सके। कैंप फोर तक पहुंचने के बाद, एक तेज तूफान आया और उन्हें वापस आना पड़ा। उन्होंने डेथ जोन पर 48 घंटे बिताए और मानवता को ऊपर रखते हुए अपना अभियान रोक दिया क्योंकि उनके को-क्लाइंबर बीमार हो गए थे।
अल्ट्रा रनर और माउंट एवरेस्ट के लिए दूसरी कोशिश:
घर वापस आने के बाद, उन्होंने अल्ट्रा रनर बनने की तैयारी शुरू कर दी। 2024 में, उनके पति ने उन्हें एक बार और कोशिश करने के लिए कहा। कैंप 4 के ठीक पहले, उन्हें फिर से रुकना पड़ा और डेथ जोन पर चार दिन बिताए।
माउंट एवरेस्ट पर विजय:
19 मई 2024 को सुबह 6:30 बजे, ज्योति रात्रे ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया।
उद्धरण:
- "आपका सपना इतना बड़ा होना चाहिए कि लोग हंसी उड़ाएं।"
- "समय किसी के पास नहीं होता है। समय हमें निकालना होता है।"
- "अगर किसी व्यक्ति की मेरी वजह से जान बचती है तो वो माउंट एवरेस्ट पर झंडा फहराने से बड़ी बात है।"
तकनीकी शब्द:
- पल्मोनरी एडिमा (Pulmonary Edema): फेफड़ों में तरल पदार्थ का जमाव।
- डीएनए टेस्ट (DNA Test): शरीर की आनुवंशिक जानकारी का विश्लेषण।
- वेदर विंडो (Weather Window): शिखर पर चढ़ने के लिए अनुकूल मौसम की अवधि।
- डेथ जोन (Death Zone): 8,000 मीटर से ऊपर की ऊंचाई, जहां ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम होता है।
- अल्ट्रा रनर (Ultra Runner): लंबी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाला व्यक्ति।
- कुंभू आइस फॉल (Khumbu Icefall): माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप के पास एक खतरनाक ग्लेशियर।
निष्कर्ष:
ज्योति रात्रे की कहानी दृढ़ता, साहस और मानवता का प्रतीक है। उन्होंने साबित कर दिया कि उम्र और परिस्थितियाँ किसी के सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बन सकती हैं। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपनों को पूरा किया और दुनिया को दिखाया कि एक साधारण महिला भी असाधारण बन सकती है।
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