Custom Duty|GST| Goods & Services Tax for bcom final year /BBA/Mcom

Commerce HorizonAbout 5 min readApr 7, 2025Watch original
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Key Concepts

कस्टम ड्यूटी (Custom Duty), इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect Tax), इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty), एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty), गुड्स (Goods), एसेसेबल वैल्यू (Assessable Value), बेसिक कस्टम ड्यूटी (Basic Custom Duty), सोशल वेलफेयर सरचार्ज (Social Welfare Surcharge), इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST), एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty), प्रोटेक्टिव ड्यूटी (Protective Duty), बिल ऑफ़ एंट्री (Bill of Entry), एक्सपोर्ट मेनिफेस्ट (Export Manifest), शिपिंग बिल (Shipping Bill), फ्री ऑन बोर्ड वैल्यू (FOB Value).

कस्टम ड्यूटी: परिभाषा, प्रकृति और प्रकार (Custom Duty: Definition, Nature and Types)

  • कस्टम ड्यूटी क्या है? यह एक टैरिफ या टैक्स है जो वस्तुओं के आयात (Import) और निर्यात (Export) पर लगाया जाता है।
  • प्रकृति: यह एक अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) है जो केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लगाया जाता है। यह विदेशी व्यापार (Foreign Trade) में लागू होता है और वस्तुओं के आयात और निर्यात को विनियमित करने में मदद करता है।
  • महत्व: यह देश के लिए राजस्व (Revenue) का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • प्रकार:
    • इम्पोर्ट ड्यूटी: भारत में बिक्री के उद्देश्य से वस्तुओं के आयात पर लगने वाला कर।
    • एक्सपोर्ट ड्यूटी: भारत से अन्य देशों को वस्तुओं के निर्यात पर लगने वाला कर।

कस्टम ड्यूटी की विशेषताएं (Characteristics of Custom Duty)

  • अप्रत्यक्ष कर: कस्टम ड्यूटी एक अप्रत्यक्ष कर है।
  • गुड्स की परिभाषा: कस्टम एक्ट के अनुसार, गुड्स में शामिल हैं:
    • गुड्स (Goods)
    • बैगेज (Baggage)
    • करेंसी (Currency)
    • नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट (Negotiable Instrument)
    • इनमूवेबल प्रॉपर्टी (Immovable Property)
  • टैक्सेबल इवेंट: टैक्सेबल इवेंट तब होता है जब गुड्स आयात किए जाते हैं।
  • री-इम्पोर्ट पर ड्यूटी: यदि कोई वस्तु आयात की जाती है और फिर मरम्मत या सुधार के लिए वापस भेजी जाती है, तो री-इम्पोर्ट पर भी कस्टम ड्यूटी लगती है। उदाहरण के लिए, अमेरिका से खरीदी गई मशीनरी की मरम्मत के लिए उसे वापस अमेरिका भेजने और फिर वापस भारत लाने पर कस्टम ड्यूटी लगेगी।

कस्टम ड्यूटी के प्रकार (Types of Custom Duty)

  • बेसिक कस्टम ड्यूटी (Basic Custom Duty): यह एसेसेबल वैल्यू (Assessable Value) पर लगाई जाती है, जो इनवॉइस वैल्यू होती है। यह आमतौर पर 5% से 10% के बीच होती है। कीमती या लग्जरी सामान पर 10% तक लग सकती है।
    • फार्मूला: बेसिक कस्टम ड्यूटी = (एसेसेबल वैल्यू x रेट ऑफ़ ड्यूटी) / 100
  • सोशल वेलफेयर सरचार्ज (Social Welfare Surcharge): यह बेसिक कस्टम ड्यूटी पर 10% की दर से लगाया जाता है। यह सामाजिक कल्याण के लिए उपयोग किया जाता है।
  • इंटीग्रेटेड टैक्स या आईजीएसटी (Integrated Tax or IGST): यह इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स है, जो वस्तुओं के अंतर-राज्यीय लेनदेन पर लगाया जाता है।
  • एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty): यदि कोई वस्तु सामान्य मूल्य से कम मूल्य पर भारत में लाई जाती है, तो उस पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई जाती है।
  • एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty): यह वस्तुओं के निर्यात पर लगाई जाती है।
  • प्रोटेक्टिव ड्यूटी (Protective Duty): यह किसी विशेष वस्तु पर अलग से लगाई जाती है ताकि उसे संरक्षित किया जा सके।

कस्टम क्लीयरेंस के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट (Documents Required for Custom Clearance)

  • बिल ऑफ़ एंट्री (Bill of Entry): यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट है जो आयातक (Importer) या कस्टम एजेंट द्वारा गुड्स के आने पर फाइल किया जाता है। यह कस्टम डिपार्टमेंट में सबमिट किया जाता है।
  • शिप मेनिफेस्ट (Ship Manifest): यह एक डॉक्यूमेंट है जो ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा तैयार किया जाता है और इसमें गुड्स के प्रकार, मात्रा और गंतव्य (Destination) का विवरण होता है।
  • बिल ऑफ़ लेडिंग (Bill of Lading): यह शिप किए गए गुड्स के लिए एक टाइटल डॉक्यूमेंट है और यह करियर (Carrier) और शिपर (Shipper) के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है।
  • एक्सपोर्ट मेनिफेस्ट (Export Manifest): इसे एक्सपोर्ट जनरल मेनिफेस्ट (EGM) भी कहा जाता है। यह करियर के प्रस्थान (Departure) से पहले भरा जाता है और शिपमेंट या एक्सपोर्ट का प्रमाण माना जाता है। यदि ट्रांसपोर्टेशन वैक्यूलर है, तो इसे एक्सपोर्ट रिपोर्ट कहा जाता है।
  • शिपिंग बिल (Shipping Bill): यह एक मुख्य डॉक्यूमेंट है जिसके आधार पर कस्टम अधिकारी एक्सपोर्ट की अनुमति देते हैं। इसमें एक्सपोर्ट किए जा रहे गुड्स, वेसल का नाम और गंतव्य का विवरण होता है। यह एक्सपोर्टर द्वारा तैयार किया जाता है ताकि कस्टम क्लीयरेंस मिल सके।

एसेसेबल वैल्यू और कस्टम ड्यूटी की गणना (Calculation of Assessable Value and Custom Duty)

कस्टम ड्यूटी की गणना दो चरणों में की जाती है:

  1. एसेसेबल वैल्यू की गणना:

    • इनवॉइस प्राइस (Invoice Price)
    • कमीशन (Commission) और ब्रोकरेज (Brokerage)
    • पैकेजिंग कॉस्ट (Packaging Cost)
    • डिजाइन और डेवलपमेंट चार्ज (Design and Development Charge)
    • रॉयल्टी (Royalty) और लाइसेंस फीस (License Fees)
    • सेलर को पेमेंट (Payment to the Seller)
    • ट्रांसपोर्ट कॉस्ट (Transport Cost)
    • इंश्योरेंस कॉस्ट (Insurance Cost)

    इन सभी को जोड़कर एसेसेबल वैल्यू निकाली जाती है।

  2. कस्टम ड्यूटी की गणना:

    • बेसिक कस्टम ड्यूटी: एसेसेबल वैल्यू पर निर्धारित दर से।
    • सोशल वेलफेयर सरचार्ज: बेसिक कस्टम ड्यूटी का 10%.
    • आईजीएसटी: एसेसेबल वैल्यू + बेसिक कस्टम ड्यूटी + सोशल वेलफेयर सरचार्ज पर निर्धारित दर से।

उदाहरण (Example)

एक भारतीय आयातक (Indian Importer) 1 अप्रैल 2022 को गुड्स इम्पोर्ट करता है। टैक्सेबल वैल्यू ₹1 लाख है।

  1. बेसिक कस्टम ड्यूटी: ₹1 लाख का 10% = ₹10,000
  2. सोशल वेलफेयर सरचार्ज: ₹10,000 का 10% = ₹1,000
  3. कुल (A + B): ₹10,000 + ₹1,000 = ₹11,000
  4. आईजीएसटी: ₹1 लाख + ₹11,000 = ₹1,11,000 का 18% = ₹19,980
  5. कुल कस्टम ड्यूटी: ₹10,000 + ₹1,000 + ₹19,980 = ₹30,980

निष्कर्ष (Conclusion)

कस्टम ड्यूटी वस्तुओं के आयात और निर्यात पर लगने वाला एक महत्वपूर्ण कर है। इसकी गणना में एसेसेबल वैल्यू, बेसिक कस्टम ड्यूटी, सोशल वेलफेयर सरचार्ज और आईजीएसटी शामिल होते हैं। कस्टम क्लीयरेंस के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट में बिल ऑफ़ एंट्री, शिप मेनिफेस्ट और शिपिंग बिल शामिल हैं।

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