क्या कहता है आपका दिमाग़ | Brain research lab at MIT

Ravish Kumar OfficialAbout 5 min readMar 20, 2025Watch original
THE SUMMARYAI-generated

Key Concepts

  • ब्रेन रिसर्च (Brain Research)
  • न्यूरो डेवलपमेंट (Neurodevelopment)
  • जेनेटिक म्यूटेशन (Genetic Mutation)
  • ऑटिज्म (Autism)
  • रेड सिंड्रोम (Rett Syndrome)
  • कॉग्निटिव फ्लैक्सिबिलिटी (Cognitive Flexibility)
  • प्लास्टिसिटी (Plasticity)
  • बेसिक साइंस (Basic Science)
  • गवर्नमेंट फंडिंग (Government Funding)
  • इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी (Electrophysiology)
  • लेजर स्कैनिंग (Laser Scanning)
  • प्रीनेटल टेस्टिंग (Prenatal Testing)

दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज: संभावनाएं और चुनौतियां

रवीश कुमार एमआईटी (MIT) बोस्टन के ब्रेन रिसर्च सेंटर में प्रोफेसर मृगनसूर से दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज, संभावनाओं और कारणों पर विस्तार से बात करते हैं।

एमआईटी का माहौल और प्रोफेसर मृगनसूर का अनुभव

प्रोफेसर मृगनसूर बताते हैं कि एमआईटी में हर छात्र को बायोलॉजी, फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस पढ़ना पड़ता है। उनकी ट्रेनिंग इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में हुई, लेकिन एमआईटी के माहौल ने उन्हें ब्रेन रिसर्च की ओर आकर्षित किया।

  • चार्ल्स कोरिया का योगदान: जिस इमारत में वे खड़े हैं, उसे चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया था, जिनकी कंपनी बॉम्बे में थी। इमारत में खुलापन है, जो प्रोफेसरों को सहजता से अपने काम के बारे में बताने के लिए प्रेरित करता है।
  • अनुसंधान के प्रति प्रेम: प्रोफेसर मृगनसूर का कहना है कि जो भी काम करें, उससे प्यार करना चाहिए।

ब्रेन रिसर्च के लिए जानवरों का उपयोग

प्रोफेसर बताते हैं कि ब्रेन के फंडामेंटल मेकैनिज्म को समझने के लिए जानवरों के ब्रेन की जरूरत होती है, खासकर माउस (चूहा) मॉडल सिस्टम की। माउस मॉडल सिस्टम ब्रेन साइंस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि माउस की जेनेटिक्स को आसानी से बदला जा सकता है।

  • जीन म्यूटेशन: माउस में एक या एक से अधिक जीन को म्यूटेट करके, आदमियों में होने वाली बीमारियों को समझा जा सकता है।
  • अनुवांशिकी (Genetics): ह्यूमंस, मंकी और माउस सभी एक फर्टिलाइज्ड एग से बनते हैं, जिनमें 20,000 जींस होते हैं। एक जीन को बदला जा सकता है, जिससे डिसऑर्डर्स हो सकते हैं।

न्यूरॉन्स और कॉग्निशन

प्रोफेसर बताते हैं कि न्यूरॉन्स के फंक्शनिंग के लिए करीब 10,000 जींस चाहिए। न्यूरॉन्स एक दूसरे से कनेक्ट करते हैं और इनफॉरमेशन ब्रेन में प्रोसेस होती है, जिसे कॉग्निशन कहते हैं।

  • कॉग्निशन: 10,000 जींस न्यूरॉन्स बनाते हैं और कनेक्ट करते हैं, जिससे इनफॉरमेशन आती है, प्रोसेस होती है और कॉग्निशन होता है।

ब्रेन का अध्ययन: तरीके और सीमाएं

प्रोफेसर बताते हैं कि ब्रेन का अध्ययन करने के कई तरीके हैं, जैसे:

  1. आदमी से बात करना और पूछना कि वे क्या देख रहे हैं और क्या सोच रहे हैं।
  2. पोस्ट मार्टम ब्रेन को स्लाइस करके माइक्रोस्कोप में देखना।
  3. एनिमल ब्रेन में इलेक्ट्रिकल प्रॉपर्टीज का अध्ययन करना।
  • इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का महत्व: ब्रेन का पूरा फंक्शन इलेक्ट्रिसिटी पर आधारित है।
  • 80 बिलियन सेल्स: ब्रेन में 80 बिलियन सेल्स होते हैं, लेकिन अभी तक सभी सेल्स का अध्ययन नहीं किया जा सका है।

ब्रेन से संबंधित बीमारियों का इलाज

प्रोफेसर बताते हैं कि माउस में म्यूटेशन करके यह सीखा जा सकता है कि आदमियों में ब्रेन से रिलेटेड बीमारियों को कैसे ठीक किया जाए।

  • प्लास्टिसिटी: डैमेज हुए सेल्स को ठीक करने के लिए इंटैक्ट सेल्स को फंक्शन मिल जाए, इसे प्लास्टिसिटी कहते हैं।
  • रीजेनरेशन: सेल्स को रीजेनरेट करना अभी संभव नहीं है।

ऑटिज्म और रेड सिंड्रोम

प्रोफेसर बताते हैं कि ऑटिज्म जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होता है। वे रेड सिंड्रोम का अध्ययन कर रहे हैं, जिसमें एमईसीपी2 (MECP2) जीन में म्यूटेशन होता है।

  • रेड सिंड्रोम: एमईसीपी2 जीन में म्यूटेशन होने से न्यूरॉन्स में एक प्रोटीन कम हो जाता है और कनेक्शन कमजोर हो जाते हैं।
  • दवा का विकास: 14 साल पहले उन्होंने एक मॉलिक्यूल प्रपोज किया था, जिसकी अब फेज थ्री ट्रायल्स हो रही हैं। यह रेड सिंड्रोम के लिए पहली अप्रूव्ड मेडिसिन हो सकती है।

प्रीनेटल टेस्टिंग और जेनेटिक काउंसलिंग

प्रोफेसर बताते हैं कि डाउन सिंड्रोम के लिए प्रीनेटल टेस्टिंग उपलब्ध है, लेकिन ज्यादातर जेनेटिक डिजीज के लिए नहीं।

  • नेटवर्क की आवश्यकता: वे एक ऐसे नेटवर्क की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जहां वैज्ञानिक जेनेटिक मटेरियल शेयर कर सकें और बीमारियों का इलाज ढूंढ सकें।

सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां

प्रोफेसर बताते हैं कि अमेरिका में हेल्थ केयर की समस्या है, क्योंकि यहां नेशनल हेल्थ प्लान नहीं है। भारत में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है, जहां इलाज महंगा है और मां-बाप टूट जाते हैं।

  • सामाजिक समर्थन: वे सामाजिक समर्थन के महत्व पर जोर देते हैं और कहते हैं कि हर चीज को मेडिकलाइज नहीं करना चाहिए।

रिसर्च के लिए फंडिंग

प्रोफेसर बताते हैं कि अमेरिका में बेसिक साइंस के लिए 90% फंडिंग सरकार से आती है। यह एक बड़ी गलती है कि भारत में यह धारणा है कि गवर्नमेंट रिसर्च को सपोर्ट नहीं करेगी।

  • बेसिक साइंस का महत्व: इंडस्ट्री हमेशा यह चाहती है कि उन्हें क्या मिल रहा है, लेकिन बेसिक रिसर्च से उन्हें क्या मिलेगा, यह नहीं मालूम।

कॉग्निटिव फ्लैक्सिबिलिटी और राजनीति

प्रोफेसर बताते हैं कि कॉग्निटिव फ्लैक्सिबिलिटी बहुत महत्वपूर्ण है। वे एक चूहे को ट्रेन करते हैं और उसके ब्रेन में इलेक्ट्रोड डालकर स्टडी करते हैं कि वह कैसे प्रॉब्लम को सॉल्व करता है।

  • राजनीति में ब्रेन का उपयोग: प्रोफेसर का मानना है कि आज के राजनीति में बहुत सारे नेता यह समझते हैं कि लोगों को कैसे प्रभावित किया जाए।

लैब का दौरा और उपकरण

प्रोफेसर अपनी लैब दिखाते हैं, जिसमें माइक्रोस्कोप, लेजर और कंप्यूटर हैं। वे लेजर से ब्रेन की स्कैनिंग करते हैं और एक्टिविटी का पता लगाते हैं।

  • भारत में रिसर्च सेंटर: प्रोफेसर का मानना है कि भारत में रिसर्च सेंटर यूनिवर्सिटी का हिस्सा होना चाहिए।

निष्कर्ष

प्रोफेसर मृगनसूर का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि वे एक दिन दिमाग से जुड़ी बीमारियों का इलाज ढूंढ लेंगे। वे माता-पिता को यह संदेश देते हैं कि उन्हें भावनात्मक और आर्थिक रूप से सपोर्ट करना चाहिए। सरकार को रिसर्च के लिए पूरा बजट देना चाहिए।

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